Expressnews7

14 को नहीं बल्कि 15 जनवरी को मनाया जायेगा मकर संक्रांति

14 को नहीं बल्कि 15 जनवरी को मनाया जायेगा मकर संक्रांति

2018-01-11 12:53:20
14 को नहीं बल्कि 15 जनवरी को मनाया जायेगा मकर संक्रांति

मकर संक्रांति की तिथि और पुण्यकाल को लेकर उलझन साफ हो गई है। ज्योतिषयों के मुताबिक पर्व 14 को नहीं बल्कि 15 जनवरी को मनाया जायेगा। हिन्दू धर्म में उदया तिथि का बहुत महत्व है जो 15 जनवरी से शुरू होगा। महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य राकेश पाण्डेय के अनुसार मकर संक्रान्ति पुण्यकाल 15 जनवरी सोमवार को ही मनाई जाएगी क्योंकि 14 जनवरी रविवार को शाम 7:35 बजे सूर्य मकर राशि पर प्रवेश करेंगे। दूसरे दिन 15 जनवरी सोमवार को ही मकर संक्रान्ति का पुण्य काल मनाना निश्चित है। शक्ति ज्योतिष केंद्र के पण्डित शक्तिधर त्रिपाठी के मुताबिक इस वर्ष की खिचड़ी (संक्रान्ति) का पुण्य काल 14 जनवरी रविवार की रात्रि 08 बजे से शुरू हो जायेगा। 15 जनवरी सोमवार को दिन के 12 बजे तक रहेगा। इसलिये पर्व 14 की शाम से 15 की दोपहर तक मनाया जा सकता है। स्नान-दान के काम 15 को ही होंगे।मान्यता है कि देवता पृथ्वी पर आते हैं: मकर संक्रान्ति के दिन यज्ञ में दिए गए द्रव्य को ग्रहण करने के लिए देवता पृथ्वी पर अवतरित होते हैं। इसी मार्ग से पुण्यात्मायें शरीर छोड़कर स्वर्गादि लोकों में प्रवेश करतीं हैं। इसलिए यह आलोक का अवसर माना जाता है। धर्मशाों के कथनानुसार इस दिन पुण्य,दान,जप तथा धार्मिक अनुष्ठानों का अत्यन्त महत्व है। इस अवसर पर किया गया दान पुनर्जन्म होने पर सौ गुना होकर प्राप्त होता है। खरमास की समाप्ति होती है: पण्डित शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि इसी संक्रान्ति से सूर्य उत्तरायन में प्रवेश करते हैं जिसे शाों में देवताओं का दिन और असुरों की रात्रि कहा गया है। इस दिन से खरमास की समाप्ति हो जायेगी।

12 राशियों में सूर्य के परिवर्तन काल को संक्रान्ति कहा जाता है, अत: किसी भी संक्रान्ति के समय स्नान,दान, जप,यज्ञ का विशेष महत्व है। पृथ्वी के मकर राशि में प्रवेश को ‘मकर संक्रान्ति’ कहते हैं। सूर्य का मकर रेखा से उत्तरी कर्क रेखा कि ओर जाना ‘उत्तरायण’ और कर्क रेखा से दक्षिणी रेखा की ओर जाना ‘दक्षिणायन’ कहलाता है। उत्तरायण में दिन बड़े हो जाते हैं और प्रकाश बढ़ जाता है। रातें दिन की अपेक्षा छोटी होने लगती हैं। दक्षिणायन में इसके ठीक विपरीत होता है। शाों के अनुसार उत्तरायण की अवधि देवताओं का दिन और दक्षिणायन की रात्रि है। वैदिक काल में उत्तरायण को ‘देवयान’ तथा दक्षिणायन को ‘पितृयान’ कहा जाता है।

14 जनवरी की शाम 7:35 से शुरू हो जायेगा पुण्यकाल,15 जनवरी को दोपहर 12 बजे तक रहेगा
इस पर्व पर तिल का विशेष महत्व है। तिल खाना और तिल बांटना इस पर्व की प्रधानता है। शीत के निवारण के लिए तिल, तेल और तूल का महत्व है। तिल मिश्रित जल से स्नान, तिल- उबटन, तिल-हवन, तिल-भोजन और तिल-दान सभी कार्य पापनाशक है। इसलिए इस दिन तिल, गुड़ और चीनी मिला लड्डू खाने और दान देने का विशेष महत्व है।


महबूब अली बने लोक लेखा समिति के अध्यक्ष

महबूब अली बने लोक लेखा समिति के अध्यक्ष

महबूब अली बने लोक लेखा समिति के अध्यक्ष

अधिकारी फील्ड में जाएं और काम करें -श्रीकान्त शर्मा

अधिकारी फील्ड में जाएं और काम करें -श्रीकान्त...

अधिकारी फील्ड में जाएं और काम करें -श्रीकान्त शर्मा

मदरसों का होना चाहिए आधुनिकीकरण-योगी

मदरसों का होना चाहिए आधुनिकीकरण-योगी

मदरसों का होना चाहिए आधुनिकीकरण-योगी

लखनऊ के ब्राइटलैंड स्कूल में घटी घटना के बाद छात्र से मिलने पहुंचे CM योगी

लखनऊ के ब्राइटलैंड स्कूल में घटी घटना के...

लखनऊ के ब्राइटलैंड स्कूल में घटी घटना के बाद छात्र...

योगी सरकार का एहम फैसला - शहरों के अंदर बूचड़खाने पर पूरी तरह से पाबंदी

योगी सरकार का एहम फैसला - शहरों के अंदर बूचड़खाने...

योगी सरकार का एहम फैसला - शहरों के अंदर बूचड़खाने...

रोक लगने पर भी धार्मिक व सार्वजनिक जगहों पर लाउडस्पीकर इस्तेमाल करने वालों को नोटिस

रोक लगने पर भी धार्मिक व सार्वजनिक जगहों...

रोक लगने पर भी धार्मिक व सार्वजनिक जगहों पर लाउडस्पीकर...

ExpressNews7