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पशुधन मंत्री प्रो0 बघेल ने पशुपालन निदेशालय के वी.पी. संस्थान का आकस्मिक निरीक्षण किया

पशुधन मंत्री प्रो0 बघेल ने पशुपालन निदेशालय के वी.पी. संस्थान का आकस्मिक निरीक्षण किया

2018-01-12 13:32:16
पशुधन मंत्री प्रो0 बघेल ने पशुपालन निदेशालय के  वी.पी. संस्थान का आकस्मिक निरीक्षण किया

कार्यालयों में अधिकारियों/कर्मचारियों की समय से
उपस्थिति सुनिश्चित की जाए अन्यथा कड़ी कार्यवाही होगी
लखनऊ -उत्तर प्रदेश के पशुधन मंत्री प्रो0 एस.पी. सिंह बघेल ने विगत दिवस पशुपालन निदेशालय के वी.पी. संस्थान का औचक निरीक्षण किया। वह सबसे पहले संयुक्त निदेशक सुधीर कुमार के कार्यालय में पहुँचे तथा उपस्थिति पंजिका का निरीक्षण किया, जिसमें कनिष्ठ लिपिक मनीष भटनागर, प्रधान सहायक मनोज, कृष्णदत्त राय कनिष्ठ सहायक बिना सूचना के अनुपस्थित थे। सुधीर कुमार ने बताया कि फोन पर तीनों कर्मचारियों ने सूचना दी थी, किन्तु इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। वी.पी. संस्थान के कमरों में गन्दगी का बोलबाला रहा। कमरों में सीलन थी तथा कई स्थानों पर दीवारों से प्लास्टर टूटी पायी गयी। वी.पी. संस्थान के कमरे में हीटर और कुर्सियां लगी हुई थीं, परन्तु वहां निरीक्षण के दौरान कोई भी मौजूद नहीं था।
वी.पी. संस्थान में चिकित्सकों की उपस्थिति पंजिका न मिलने पर उन्होंने नाराजगी जतायी। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न विभागों/ईकाइयों का गहनता से निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन में लापरवाही पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी ईमानदारी एवं निष्ठा से करना चाहिए। भविष्य में सुधार न पाये जाने पर उनके विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी।
वी.पी. संस्थान के अधिकारियों को निर्देश देते हुए प्रो0 बघेल ने कहा कि बढ़ती हुई पशुओं की संख्या के अनुपात में अधिक से अधिक पशु चिकित्सालयों की आवश्यकता होगी।  उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रति 15 हजार से 20 हजार पशुओं की संख्या पर एक पशु चिकित्सालय है, जिसे मानक के अनुसार प्रति 5 हजार पशुओं पर एक चिकित्सालय के स्तर पर लाया जायेगा। अभी कुल लगभग 2200 पशु चिकित्सालय है, जिसे मानक के अनुसार 3300 होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शीतगृहों में भण्डारित पशुओं के वीर्य का प्रयोग कर उन्नत कोटि के दुधारू पशुओं की संख्या मंे वृद्धि करके ही प्रदेश में दूध की नदियां बहायी जा सकती है।
पशुधन मंत्री ने कहा कि कामधेनु योजना की तरह ही भेड़ों-बकरियों के लिए योजना बनाने की आवश्यकता है। बकरी का दूध कई बीमारियों में लाभदायक होता है। इस प्रकार भेड़-बकरी पालन को भी बढ़ावा देना जरूरी है। श्री बघेल ने रोजगारपरक पशु चिकित्सा शिक्षा के डिप्लोमा एवं अन्य शार्ट टर्म कोर्स चलाने की बात कही, जिससे पशुपालक एवं मेधावी नौजवानों को भी फायदा हो सके।
उन्होंने वी.पी. संस्थान के विभिन्न विभागों/ईकाइयों के बारे में अधिकारियों से विभागवार जानकारी ली। उन्होंने टिश्यू कल्चर लैब का सबसे पहले निरीक्षण किया, फिर स्माल एनीमल हाउस का निरीक्षण किया। उसके बाद एच.एस. लैब का निरीक्षण किया वहां उन्होंने पैकिंग शाखा में वैक्सीन रखरखाव का निरीक्षण किया। अन्त में स्वाइन फीवर लैब का भी निरीक्षण किया।
इस अवसर पर पशुपालन निदेशालय के निदेशक, प्रशासन, चरण सिंह यादव, तथा निदेशक रोग नियंत्रण सहित संयुक्त निदेशक उपस्थित रहे।


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