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कासगंज हिंसा में 16 एफआईआर दर्ज ,अब तक 49 लोग हुए गिरफ्तार

कासगंज हिंसा में 16 एफआईआर दर्ज ,अब तक 49 लोग हुए गिरफ्तार

2018-02-07 06:34:50
कासगंज हिंसा में 16 एफआईआर दर्ज ,अब तक 49 लोग हुए गिरफ्तार

कासगंज. हिंसा के 10वें दिन सोमवार को पुलिस ने पहली बार किसी पर सांप्रदायिक हिंसा की धारा 153 (ए) में केस दर्ज किया। मंगलवार को दंगे का दूसरा केस दर्ज हुआ। इसमें अफवाहों को रोकने के लिए वॉट्सऐप ग्रुप चलाने वाले 2 एडमिन को नामजद किया गया है। इन पर धार्मिक भावनाओं को भड़काने का आरोप है। मंगलवार को चंदन हत्याकांड में आरोपी सलमान को पुलिस ने कासगंज में गिरफ्तार कर लिया।

26 जनवरी से 6 फरवरी तक कासगंज हिंसा में 16 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके अलावा अब तक 49 लोगों की गिरफ्तारी, 63 के खिलाफ नामजद केस दर्ज हुआ है, जबकि 271 अज्ञात हैं। सबसे ज्यादा 5 एफआईआर थाना प्रभारी कासगंज रिपुदमन सिंह ने दर्ज करवाई हैं। मृतक चंदन के पिता सुनील गुप्ता ने एक एफआईआर की है।

इधर, लखनऊ में चंदन की बहन कीर्ति और मौसी प्रीति ने सीएम योगी से मुलाकात की। बहन कीर्ति ने बताया कि सीएम ने चंदन को शहीद का दर्जा दिए जाने के मामले में कोई आश्वासन नहीं दिया है। जबकि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। हम चाहते हैं कि कासगंज में चंदन के नाम से कोई चौक भी बनाया जाए। हालांकि जिले के डीएम आरपी सिंह अभी इसे सांप्रदायिक हिंसा नहीं मानते हैं। कहते हैं कि अब सब बिल्कुल ठीक है।

कासगंज में 26 जनवरी, 2018 यूपी का कासगंज जिला वंदेमातरम और भारत माता की जय के नाम पर सुलग गया। 19 साल के चंदन की हत्या हुई। सैकड़ों गाड़ियां फूंक दी गईं। हिंसा के 11 दिन बाद अब जिले के हालात बेहतर हो रहे हैं। बच्चे स्कूल जा रहे हैं। दुकानें खुल गई हैं। हालांकि अनहोनी के डर से पुलिस गली-गली घूम रही हैं। डीएम-एसपी रोज गश्त पर जाते हैं। हत्याकांड में 4 मुख्य किरदार थे। चंदन, जिसकी हत्या हुई। जिस पर हत्या का आरोप है। जिसकी भीड़ ने आंख फोड़ दी। और राहुल, जिसके बारे में कहा गया कि उसकी भी हत्या कर दी गई है। पर वह सलामत निकला।

कासगंज में एंट्री करते ही 100 मीटर दूर शिवालय गली है। चंदन का घर यहां से चंद कदम की दूरी पर है। घर के आसपास पुलिस वाले बैठे हैं। बाहर चंदन के बड़े भाई विवेक साथियों के साथ बैठे मिले। घर के बाहरी कमरे में तिरंगे के साथ चंदन की फोटो रखी है। आगे दिया जल रहा है। बगल में कंबल ओढ़े लेटे चंदन के पिता सुशील कहते हैं कि क्रिया की प्रतिक्रिया तो होती ही है। मेरा बेटे ने पहली बार तिरंगा यात्रा नहीं निकाली, वह बचपन से ही प्रभात फेरियों में जाता था।

मोदी-योगी की सरकार है, इसलिए राष्ट्रभक्ति का जज्बा उसमें और बढ़ गया। मेरा बच्चा अति उत्साह में चला गया। इस बार ठान लिया था कि तिरंगा यात्रा मुस्लिम इलाके से निकालेंगे और कहां लिखा है कि एक इलाके से तिरंगा यात्रा निकलेगी और दूसरे से नहीं?' चंदन की मां संगीता अब भी बेसुध सी हैं। दिन भर घर के अंदर के बरामदे में बैठी रहती हैं।
संगीता कहतीं हैं कि मेरा बेटा गरीबों को खाना और कंबल देता था। साजिश करके उसे मार दिया। मेरे बेटे को शहीद घोषित किया जाए, क्योंकि मरते वक्त भी उसने तिरंगा थाम रखा था।

अकरम स्ट्रीट नंबर-4, इकरा कॉलोनी अलीगढ़ में अपनी ससुराल में हैं। 26 जनवरी को लखीमपुर खीरी से ससुराल आते वक्त दंगाइयों ने उन पर हमला कर दिया था। इसमें उनकी एक आंख चली गई। दर्द अब भी है। पर खुश हैं कि जान तो बच गई। अकरम की गोद में 6 दिन की बच्ची है। 27 जनवरी को जन्मी इस बच्ची का नाम उन्होंने आयरा (तारीफ़ के काबिल) रखा है। ससुर मुतिउर्रब कहते हैं कि अफसोस बस इतना सा है कि अलीगढ़ आने के बाद से न कोई अधिकारी आया न ही कोई नेता जो हालचाल ले।

इस पर अकरम कहते हैं कि किसी हिंदू भाई के साथ यही होता तो क्या सरकार का यही रवैया होता? यही खलता है। मुस्लिम हूं, इस वजह से किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मैं उनको गले लगाना चाहता हूं, जिन्होंने मुझे जान से नहीं मारा। यह मेरी बच्ची की दुआएं हैं, जो मैं सही सलामत घर पहुंच गया। हादसे के बाद मैंने ससुर को फोन किया। पर वह हॉस्पिटल में पत्नी के साथ थे। फोन भी पत्नी के पास ही था। तब मैंने उसे बताया कि छोटा सा हादसा हो गया है। तब तक टीवी पर खबर चलने लगी।

कासगंज से 7 किमी दूर नगला खांजी गांव है। राहुल उपाध्याय यहीं का रहने वाला है। गांव पहुंचने पर झोपड़ी में बैठे बुजुर्ग से राहुल का नाम पूछा तो मुस्कुराते हुए आगे जाने को कह दिया। राहुल के घर के सामने चबूतरा है, जहां राहुल के पिता मिले। उन्होंने बताया कि कासगंज दंगे के कारण चंदन के साथ-साथ राहुल रातों-रात मशहूर हो गया।

राहुल ने बताया कि 26 जनवरी को मेरे दोस्त सुधांशु का फोन आया कि कासगंज मत आना। यहां दंगा हो गया है। मैं अपने काम पर लग गया। 27 की रात साढ़े आठ बजे फिर सुधांशु का फोन आया है कि- राहुल तुम ठीक हो न? मैंने कहा हां। लेकिन हुआ क्या है? तो सुधांशु ने बताया कि मेरा फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें मुझे चंदन के साथ शहीद बताया जा रहा है। मैंने सोचा मजाक कर रहा है। पर जब उसने फोटो भेजा तो मुझे भी आश्चर्य हुआ। सोचा फेसबुक पर वीडियो डाल कर बता दूं कि मैं जिंदा हूं। पर इंटरनेट सर्विसेस बंद कर दी गई थी। 29 जनवरी को मैं किसी तरह पुलिस के पास पहुंचा और बताया कि सलामत हूं।

कोतवाली कासगंज में कोतवाल रिपुदमन सिंह से मुलाकात हुई। रिपुदमन ने बताया कि अब माहौल शांत है। कोतवाली से आरोपियों का घर बड्डू नगर महज डेढ़ सौ मीटर दूर होगा। 20 फीट चौड़ी गली में सन्नाटा पसरा हुआ है। आरोपी सलीम, वसीम और नसीम अगल-बगल के घरों में रहते हैं। दोनों घरों पर ताला लटका है। गली क्या पूरे मोहल्ले में सन्नाटा है। थोड़ी दूर पर पीपल के पेड़ के नीचे कुछ पुलिस वाले बैठे हैं। पुलिस की पकड़ में आये सलीम का घर दो मंजिला है। फर्स्ट फ्लोर की बालकनी पूरी तरह से सलाखों से बंद है। सेकंड फ्लोर पर छत है जो खुली है। बताया गया कि वहीं से गोली चली थी।


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