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आतंक रोधी कानून 1997 में संशोधन के लिए अध्‍यादेश पर किया हस्‍ताक्षर

आतंक रोधी कानून 1997 में संशोधन के लिए अध्‍यादेश पर किया हस्‍ताक्षर

2018-02-13 07:10:08
आतंक रोधी कानून 1997 में संशोधन के लिए अध्‍यादेश पर किया हस्‍ताक्षर

इस्‍लामाबाद -राष्‍ट्रपति ममनून हुसैन ने पिछले शुक्रवार को गुपचुप तरीके से आतंक रोधी कानून 1997 में संशोधन के लिए एक अध्‍यादेश पर हस्‍ताक्षर कर दिया है। इस हस्‍ताक्षर के बाद जमात उद दावा आतंकी संगठन करार दे दिया गया। बता दें कि इस अध्‍यादेश के बारे में सोमवार को सार्वजनिक घोषणा की गयी। हालांकि अगर यह अध्यादेश कानून का रूप नहीं लेता है तो समय सीमा खत्म होने के बाद जमात-उद-दावा पर से प्रतिबंध अपने आप हट जाएगा।

इस अध्यादेश के तहत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) द्वारा प्रतिबंधित व्यक्तियों और संगठनों को प्रतिबंधित कर दिया गया। इस सूची में जमात-उद-दावा (जेयूडी) व तालिबान जैसे कई संगठन शामिल है। इससे पहले पाकिस्तान ने साल 2005 में यूएनएससी प्रस्ताव 1267 के तहत लश्कर-ए-तैयबा को एक प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था।

भारत भी हमेशा यह कहता रहा है कि जमात-उद-दावा प्रमुख सईद 2008 नंवबर में हुए मुंबई हमले का मास्टर माइंड है। इसके लिए अमेरिका ने भारत का समर्थन करते हुए सईद के ऊपर एक करोड़ डॉलर का इनाम रखा है।

अध्यादेश आतंकवाद निरोधक अधिनियम (एटीए) की एक धारा में संशोधन करता है और अधिकारियों को यूएनएससी द्वारा प्रतिबंधित व्यक्तियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने, उनके कार्यालयों तथा बैंक खातों को सील किए जाने का अधिकार प्रदान करता है। सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक प्राधिकरण (एनएसीटीए) ने इस नए कदम की पुष्टि करते हुए कहा कि गृह मंत्री, वित्त मंत्री और विदेश मंत्री के साथ-साथ एनएसीटीए की आतंकवाद वित्तपोषण विरोधी (सीएफटी) इकाई इस मामले पर एक साथ मिलकर काम कर रही है।

अब तक पाकिस्तान जमात उद दावा जैसे संगठनों को बस आतंकी सूची में रखकर काम चला रहा था। कभी प्रतिबंध की बात करता था तो कभी उस पर आर्थिक तौर पर चंदा न लेने के लिए प्रतिबंध की बात करता था। लेकिन राष्‍ट्रपति द्वारा अध्‍यादेश पर हस्‍ताक्षर के बाद जमात उद दावा घोषित तौर पर आतंकी संगठन हो गया है।

पाकिस्तान की ओर से यह कदम फाइनेंसियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स (एफएटीएफ) की बैठक से पहले लिया गया है। इस बैठक का आयोजन पेरिस में 18 से 23 फरवरी तक होना है। एफएटीएफ ने ‘ग्रे और ब्‍लैक लिस्‍ट’ बनाया है जिसमें उन देशों को रखा है जो मनी लांड्रिंग व आतंक फंडिंग को खत्‍म करने में कमजोर हैं। ऐसा माना जा रहा था कि अमेरिका के दबाव में आकर एफएटीएफ पाकिस्तान को भी ग्रे लिस्ट में न डाल दे।

वॉचडॉग के पास उपयुक्‍त मानकों पर उतीर्ण न होने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है लेकिन इसकी लिस्‍टिंग से अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर फर्क पड़ता है। 2012 के फरवरी में पाकिस्‍तान एफएटीएफ की ग्रे लिस्‍ट में चला गया था और तीन सालों तक इसे वहीं रहना पड़ा था।


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