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प्रांशु मिश्रा ने नीरज श्रीवास्तव के समर्थन में मतदाताओं से मांगा वोट, लिखा पत्र

प्रांशु मिश्रा ने नीरज श्रीवास्तव के समर्थन में मतदाताओं से मांगा वोट, लिखा पत्र

2018-04-15 05:49:56
प्रांशु मिश्रा ने नीरज श्रीवास्तव के समर्थन में मतदाताओं से मांगा वोट, लिखा पत्र
आपका वोट तय करेगा समाज के समक्ष कौन होगा आपका प्रतिनिधि. 
हमारे नेता से होती है हमारी भी पहचान
अध्य्क्ष पद पर मैं क्यों Neeraj Srivasstava के साथ
 
दोस्तों,  
 
संवाददाता समिति के अध्य्क्ष के रूप में आज यह मेरा आपसे आखिरी संवाद है. कल समिति के नए अध्य्क्ष और पदाधिकारी कमान संभाल लेंगे..और अगले 2 साल वही लोग समाज में, सरकार और प्रशासन के समक्ष आपके प्रतिनिधि होंगे..
 
कौन होगा आपका प्रतिनिधि, इसका फैसला आप, आज अपने मताधिकार के जरिए करेंगे. जो प्रतिनिधि होंगे..उन्हीं से हमारी पहचान होगी. हम कैसे हैं...किस तरह की लीडरशिप में विश्वास करते हैं..यह आज तय होगा.
 
जाहिर है ऐसे में इस बार का चुनाव महत्वपूर्ण है...और सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि हमारा अध्य्क्ष कौन होगा.  अध्य्क्ष पद पर 12 उम्मीदवार हैं. मैं चुनाव क्यों नहीं लड़ा..यह पहले ही स्पष्ट कर चुका हूँ. 
मैं नहीं चाहता था की मुझ पर पद से चिपके रहने का आरोप लगे या फिर लोग सोचे की दोबारा अध्य्क्ष बने रहने के पीछे क्या लालच है..
 
अध्य्क्ष के रूप में, या उससे पहले मैने कभी भी पर्दे के पीछे से राजनीति नहीं की है. मेरे पास यह विकल्प था की मैं तटस्थ हो जाता..कोई नृप होय हमें का हानि वाले भाव से रहता..लेकिन मैने ऐसा नहीं किया..इस बात की परवाह किये बगैर की चुनावी समर में अध्य्क्ष पद पर उतरे तमाम साथी बुरा मान जाएंगे, मैंने खुल कर नीरज के पक्ष में आने का फैसला किया है..
 
और सिर्फ मैं ही नहीं कई अन्य साथी, जिनमें तमाम वरिष्ठ जन शामिल हैं..अब खुल कर नीरज के साथ हैं. यहां उनका नाम लेना उचित नहीं होगा..लेकिन जो माहौल बना है वह स्पष्ट है...
 
सवाल है इस चुनाव में अध्य्क्ष पद के लिए नीरज श्रीवास्तव ही क्यों...
 
जवाब स्पष्ट है हम तमाम लोग एक ईमानदार, लोकतंत्र में यकीन रखने वाला नेत्तृव चाहते हैं। ऐसे में लगातार अध्यक्ष पद से चिपके रहने की लालसा पाले प्रत्याशी, एक खास तरह की अस्वीकारर्य राजनीति करने वाले प्रत्याशी के साथ तो नहीं हो सकते।
 
मैने पहले भी लिखा था कि हमारा साथ उसको जो तमाम संघर्षों में हमारे साथ रहा हो। फर्क इस बात से नहीं पड़ता की वह किस ब्रांड में काम करता है। बड़े अखबार या चैनल की नौकरी करता है या अपना खुद का अखबार निकालता है। वह किस धर्म, जाति -बिरादरी का है यह तो और भी महत्वहीन है। महत्वपूर्ण यह है कि पत्रकारोॆं के समक्ष मौजूद चुनौतियों से निपटने के लिए उसके पास विजन क्या है, नजरिया क्या है। समिति का पदाधिकारी चुने जाने के बाद, समिति के सभी 21 लोगों को साथ ले चलने की कितनी क्षमता उसमें है। उसके काम काज का तरीका लोकतांत्रिक है कि नहीं।
 
मान्यता प्राप्त पत्रकारों के समक्ष चुनौतियों से निपटने के लिए एक साफ सुथरा, सशक्त, समझदार, विनम्र, लोकतंत्र में यकीन रखने वाला एक ऐसा अध्यक्ष चाहिए, जिसके कामकाज के तरीके से लोग पहले से वाकिफ हों....यानि tried and tested type.
 
जाहिर है अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ रहे तमाम नामों के बीच जो एक व्यक्ति इन तमाम कसौटियों पर खरा उतरता है, वह  Neeraj Srivasstava ही है. वर्ष 2012 में चुनी गई कमेटी में भी वह पदाधिकारी थे। यह कैसे भूला जा सकता है कि बाद में जब उक्त समिति के अध्यक्ष-मंत्री चुनाव कराना ही नहीं चाह रहे थे, तो नीरज ने समिति के अंदर से विरोध का पहला बिगुल फूंका था। 
 
कालांतर में जब मैं समिति का अध्यक्ष चुना गया तो नीरज समिति के सचिव थे। सचिव के रूप में इनके काम करने का तरीका बेहतरीन था। तमाम प्रत्यावेदन ड्राफ्ट करने से लेकर, समिति के बाकी साथियों को साथ लेकर चलने के लिए वह हमेशा सक्रीय रहे। वर्तमान में जब हमारी समिति ने एक चुनाव कराने और समय पर चुनव की मुहीम छेड़ी तो उसमें भी नीरज कदम दर कदम साथ थे।
 
किस तरह एक साझा बयान जारी हुआ, कैसे उन तमाम प्रयासों को शिकस्त दी गई जो चुनाव टालने पर आमादा थे...यह सब आप लोगों को पता है। 
 
मुझे पता है कि किसी एक के पक्ष में समर्थन की अपील जारी करना तलवार की धार पर चलने जैसा है....बाकी तमाम प्रत्याशी जो व्यक्तिगत स्तर पर आपको उतने ही प्रिय हैं..बुरा मानेंगे। लेकिन पत्रकारों के व्यापक हित के आगे..कई बार निजी संबंधों में कड़ुवाहट लाने का जोखिम भी उठाना पड़ता है। मुझे उम्मीद है कि ऐसे अन्य साथी इस बात को समझेंगे की यह चुनाव सिर्फ जीतने के लिए नहीं है...इस बार का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। चुनाव के बाद अध्यक्ष पद पर एक काकस-सिंडीकेट का कब्जा न हो, नेतृत्व एक साफ सुथरे व्यक्ति के हाथ में रहे..इसके लिए उन तमाम लोगों को निजी पसंद-नापसंद से ऊपर उठकर एक जगह वोट करना होगा...जो पद से चिपके रहने वाले सदाबहार नेता जी की राजनीति का विरोध करते हैं।
 
नीरज उन दूसरे प्रत्याशियों की तरह नहीं है...जो सिर्फ चुनाव के वक्त आपके बीच आ गए हैं। वह बीते कई सालों से लगातार पत्रकारों के सार्वजनिक जीवन में सक्रीय हैं। बड़े अखबारों में काम कर चुकने का उनका अनुभव है। छोटे अखबारों के मुद्दों पर भी वह संवेदनशील हैं और लगातार संघर्षरत हैं।
 
जाहिर है ऐसे में उम्मीद ही नहीं विश्वास भी है कि वह चुनाव के बाद भी हमारे आपके बीच में ही रहेंगे। उन्हें ढूढ़ना नहीं पड़ेगा। हार-जीत तो चुनावी समर के दो पहलू हैं। नेता वही जो दोनों परिस्थितियों में आपके बीच रहे। मुझे पूरा भरोसा है की अापके सहयोग से अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर नीरज हमारे नेतृत्व को और बेहतर दिशा दे सकेंगे।
 
लिहाजा आप से पुन एक बार अपील है कि आज 15 अप्रैल को मतदान में अध्यक्ष पद पर नीरज श्रीवास्तव  के पक्ष में मतदान करें। कोई कनफ्यूजन न रहे। वोटों का बंटवारा न होने दें।
 
अभिवादन सहित
 
प्रांशु मिश्र
अध्य्क्ष
उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति
लखनऊ
15-4-18

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