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ग्राम प्रधान समाज की वह कड़ी हैं, जो अपने ग्राम की दशा व दिशा दोनों ही परिवर्तित कर सकते हैं: मुख्यमंत्री

ग्राम प्रधान समाज की वह कड़ी हैं, जो अपने ग्राम की दशा व दिशा दोनों ही परिवर्तित कर सकते हैं: मुख्यमंत्री

2018-06-02 16:22:41
ग्राम प्रधान समाज की वह कड़ी हैं, जो अपने ग्राम की  दशा व दिशा दोनों ही परिवर्तित कर सकते हैं: मुख्यमंत्री

लखनऊ:-उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्राम प्रधानों का आह्वान करते हुए कहा कि वह अपनी ऊर्जा का प्रयोग समाज व राष्ट्र के निर्माण में करें। उन्हांेने कहा कि शासन द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अन्तिम व्यक्ति तक पहुंचे, यह हमारा नैतिक दायित्व ही नहीं अपितु परम कर्तव्य भी है।
    मुख्यमंत्री आज जनपद हरदोई स्थित रसखान प्रेक्षाग्रह में ‘ग्राम स्वराज अभियान’ के अन्तर्गत आयोजित ‘सबका साथ, सबका विकास’ की अवधारणा से ओत-प्रोत ‘मुख्यमंत्री ग्राम प्रधान संवाद‘ कार्यक्रम में ग्राम प्रधानों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान समाज की वह कड़ी हैं, जो अपने ग्राम की दशा व दिशा दोनों ही परिवर्तित कर सकते हैं। ग्राम प्रधानों को अपनी सकारात्मक सोच से भेदभाव रहित ग्राम के विकास में अपना योगदान देना होगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम प्रधान जब चुनाव लड़ता है, तो वह, व्यक्ति विशेष अथवा परिवार विशेष का सदस्य होता है, परन्तु जब वह निर्वाचित होकर आता है, तो वह सर्वजन का सदस्य हो जाता है। इसलिए ग्राम प्रधान अपने गांव में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की अवधारणा को आत्मसात करते हुए ग्राम के प्रत्येक व्यक्ति के साथ अपने परिजन सा व्यवहार कर शासन की संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मुहैया कराएं। तभी गांव में खुशहाली एवं भाइचारे की भावना को बल मिलेगा और लोगों का जीवन सुखमय व जीवन स्तर ऊँचा उठेगा।
    मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रधानों का आह्वान करते हुए कहा कि वे लोगों में जनजागरूकता लाएं, ताकि वह अपने अधिकारों के प्रति सजग हों और योजनाओं का लाभ उठा सकें। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम पंचायतों में जो समितियां हैं, उन समितियों के पदाधिकारी/सदस्यों को समितियों के कर्तव्यों एवं उददेश्यों की भरपूर जानकारी हो, ताकि वह समितियां सक्रिय होकर जमीनी कार्य कर सकें। उन्होंने कहा कि केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों को बजट सीधे ग्राम निधि खाते में मुहैया कराया जा रहा है। इसमें किसी भी प्रकार से उच्चाधिकारियों की दखलन्दाजी भी नहीं है। अतः ग्राम प्रधान जिस प्रकार चाहे अपने ग्राम का विकास कर सकते हैं। उन्होंने गांव की स्वच्छता पर बल देते हुए कहा कि गांव को स्वच्छ रखने में ग्राम प्रधान अपनी महती भूमिका निभाएं, तभी गांधी जी के ग्राम स्वराज की परिकल्पना साकार हो सकेगी।