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STF इन्सपेक्टर रणजीत राय ने वरिष्ठ पत्रकार को दी धमकी कहा STF में हूँ जो उखाड़ना हो, उखाड़ लो

STF इन्सपेक्टर रणजीत राय ने वरिष्ठ पत्रकार को दी धमकी कहा STF में हूँ जो उखाड़ना हो, उखाड़ लो

2018-06-11 09:34:57
STF इन्सपेक्टर रणजीत राय ने वरिष्ठ पत्रकार को दी धमकी कहा STF में हूँ जो उखाड़ना हो, उखाड़ लो

LUCKNOW--- देश के सबसे बडे सूबे की राजधानी मे अपराधी नही बल्कि पुलिस और एस टी एफ के लोग कानून की धज्जिया उडा रहे है। मामला वरिष्ठ पत्रकार और जनसन्देश टाइम्स के सम्पादक सुबाष राय से जुडा है जब उनको एसटीएफ का इन्सपेक्टर रणजीत राय धर जाकर धमकाता है और कहता है मै एस टी एफ से रणजीत राय हूँ, जो उखाड़ना हो, उखाड़ लो। उपरोक्त भाषा का प्रयोग कर रणजीत राय वरिष्ठ पत्रकार और जनसन्देश टाइम्स के सम्पादक सुबाष राय को धमकाता है और गाली गलौज करते हुये उनको औकात बताने तक की हिम्मत करता है।
मामला एसटीएफ के इन्सपेक्टर रणजीत राय के एक रिश्तेदार राकेश तिवारी से जुडा हुआ है जो सुभाष राय के पडोस मे रहता है। उसने अपने मकान को बनवाने के लिये कई टक मोरग सुभाष राय के दरवाजे के सामने बिना उनके पूछे गिरवा दिया उस वक्त सुभाष राय धर से बाहर थेे लिहाजा कोई उस वक्त रोकने या टोकने वाला नही था। सुभाष राय कई दिन बाद जब धर पहुचे तो देखा उनके धर पर कई टक मोरग किसी ने गिरवा दिया है पता किया तो पता चला कि उनका एक पडोसी राकेश तिवारी ने उपरोक्त मोरग गिरवाया है। उन्होने राकेश तिवारी को दरवाजे के आगे से थोडा मोरग हटवाने का आग्रह किया। शुरू मे राकेश तिवारी ने मोरग को हटवाने के लिये हामी भर दी लेकिन उसने मोरग दरवाजे पर से नही हटवाया तो सुभाष राय ने इस पर आपत्ति दर्ज करवाते हुये 100 नम्बर पर शिकायत की पुलिस आयी और राकेश तिवारी की गल्ती देख उनको तत्काल मोरग हटवाने को कहा। राकेश तिवारी ने पुलिस के सामने मोरग हटवाने की बात तो कही लेकिन कही न कही उसे यह बात चुभ गयी थी कि मामले मे पुलिस को क्यो बुलवाया गया। राकेश तिवारी ने पुलिस से कही बात का पालन तो नही किया बल्कि अपने एक रिश्तेदार रणजीत राय जो कि एसटीएफ मे इन्सपेक्टर है उनको बुलवा लिया।  एसटीएफ के इन्सपेक्टर रणजीत राय अपने एक दर्जन साथियो के साथ सुभाष राय के धर पर धावा बोलते हुये सुभाष राय से वह बर्ताव किया जो सभ्य समाज मे मान्य नही नही है। एसटीएफ के

इन्सपेक्टर रणजीत राय ने आव देखा न ताव सुभाष राय से जो कहा वह निम्नवत है........
रणजीत राय-‘अब तुम किसी पुलिस वाले को, किसी दरोगा को, एस पी को, जिसको चाहो बुला लो.... देखता हूँ तुम्हारी औकात क्या है... ये देखने से ही गुंडा लगता है, पत्रकार है, गुंडई करता है..... अब बता कौन आएगा तुझे बचाने, बोल कौन है बुला.... नम्बर दे मैं बुलाता हूँ,।
उपरोक्त बातो से सुभाष राय डर गये उन्हे लगा कि पुलिस के आये हुये एक दर्जन लोग उनके साथ कभी भी मारपीट कर सकते है।

सुभाष राय ने हुबहू जो वर्णन किया वह इस प्रकार है.....
........एक गुस्साया हुआ आदमी दर्जन भर लोगों के साथ रविवार शाम तीन से चार के बीच मेरे विराज खंड स्थित आवास पर आ धमका. तब मैं और मेरी पत्नी केवल हम दो ही घर पर थे. उनमें से कई हथियारों से लैस थे. वे सब धड़ाधड़ रैम्प फलाँगते हुए मेरे दरवाजे के अंदर आ गए. चीखते, चिल्लाते और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए. हमलावर अन्दाज. एक झटके में डरा देने की कोशिश. हम अवाक थे. लगा कि  वह किसी भी क्षण मुझे थप्पड़ जड़ देगा, मेरी पत्नी पर हमले कर देगा.
मैं एक बारगी  डर गया लेकिन अपने डर से बाहर आते हुए मैंने उससे कहा, आप बाहर जाइए, दरवाजे से हटिए, मैं आप से बात नहीं कर रहा हूँ. वह खौखियाते हुए बोला, तुम्हें मुझसे बात करनी पड़ेगी, क्यों नहीं बात करेगा? बोल कौन पुलिसवाला है जो तुम्हारी मदद करेगा. बुला, फोन कर. मैंने पूछा, आप हैं कौन? वह मुझे डपटते हुए चीखा, मैं एस टी एफ से हूँ, रणजीत राय. क्या उखाड़ लेगा..... लग रहा था कि वह कभी भी मुझे घसीट लेगा, मार देगा... उसकी भाषा में खिसियाहट, उग्रता, आक्रामकता और गंदगी भरी हुई थी...  चिल्लाते हुए उसके हाथ बिलकुल मेरे सिर के पास तक लहरा रहे थे. मेरी पत्नी डर गयीं थीं, वे मुझे अंदर खींचने का प्रयास कर रहीं थीं. मैं जितना पीछे हट रहा था, वह उतना आगे बढ़ रहा था. लगभग आधे घंटे तक वह और उसके मवाली साथी मेरे घर पर हंगामा करते रहे....
मुझे नहीं पता कि कोई भी एस टी एफ वाला इस तरह सादी वर्दी में कैसे किसी भी आम नागरिक को डरा-धमका सकता है. मुझे यह भी नहीं पता कि वह किसी असाइनमेंट पर था या अपने अधिकारियों को सूचित करके आया था या निजी तौर पर ही अपने रिश्तेदारों, मित्रों की गैरकानूनी मदद करने आया था. इस तरह किसी फोर्स का कोई आदमी रंगबाजी और सरासर गुंडई की मुद्रा में किसी सभ्य नागरिक के घर धावा बोलकर केवल एस टी एफ की  छवि को ही बट्टा लगाएगा और उसने ऐसा ही किया......
सुभाष राय ने बताया मामला था क्या-
मैं और मेरी पत्नी, दोनों एक जून को बाहर चले गए थे, जब आठ की रात दो बजे वापस लौटे तो यह देखकर सन्न रह गए कि किसी ने घर के सामने कई ट्रक मोरंग इस तरह गिरवा दिया था कि मैं अपनी गाड़ी बाहर नहीं निकाल सकता था पता करने पर मालूम हुआ कि मोरंग मिस्टर राकेश तिवारी ने डलवाया था।. अगले दिन नौ को मैंने उनसे कहा कि भाई घर के सामने से सिर्फ इतना मोरंग हटा लें कि  मैं गाड़ी निकाल सकूँ और कार्यालय जा सकूँ। उसने कहा, जी बिलकुल अभी करवा दूँगा. जब दस बज गया और कोई हलचल नहीं हुई तो मेरी पत्नी उसके घर गयीं और वही आग्रह दुहराया। राकेश और उसकी पत्नी दोनों ने आश्वस्त किया की बहुत जल्द वे मोरंग हटा लेंगे पर शाम तक कुछ नहीं हुआ. मैं कार्यालय नहीं जा सका और हम अपने घर में लगभग कैद हो गए. मेरे पास अपने हर काम के लिए पैदल निकलने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा। मेरे लिए इस उम्र में यह सम्भव नहीं था।
शाम को मैंने राकेश तिवारी से कहा कि आप यहाँ से मोरंग हटा लें अन्यथा मुझे कानून की मदद लेनी पड़ेगी. पहले तो वह सामान्य ढंग से बात करता रहा और कहता रहा कि अब आप ही बताइए  इसे कहाँ ले जाऊँ. मैं जानता हूँ कि आप को तकलीफ हो रही है लेकिन मेरे पास कोई और चारा नहीं है.  वह मेरी मुश्किल  समझने को कतई तैयार नहीं था। बात करते -करते अचानक उसकी भोंहें तन  गयीं और भाषा बदल गयी. वैसे भी वह मुहल्ले में अकारण  लोगों  से झगड़ता रहता है. वह बंदूक भी रखता है. वह गुस्से में बोला, अब मोरंग यहीं रहेगा, आप को जो उखाड़ना हो, उखाड़ लीजिए. मजबूरन मुझे 100 पर पुलिस को खबर करनी पड़ी. पुलिस आती, इसके पहले तिवारी ने अपने कुछ लोगों बुला लिया. वे आए, मेरी घंटी बजायी और धमकाने वाली भाषा में बात करने की कोशिश की. मैंने किसी से बात करने से इनकार किया और दरवाजा बंद करके घर में चला गया. मैंने पुलिस के उच्च अधिकारियों को भी सूचना दे दी थी. रात आठ बजे के आस-पास एक पुलिस अधिकारी आए, उन्होंने सब देखा, राकेश तिवारी को बुलवाया और उनसे कहा, आप इस तरह सड़क बंद नहीं कर सकते. कल सुबह जे सी बी मंगवाइए और यहाँ से मोरंग हटवाइए. तिवारी ने सहमति जतायी और पुलिस अफसर को आश्वस्त किया कि  सवेरे काम हो जाएगा.
अगला दिन 10 जून. सवेरा हुआ. दस बजा, बारह बजा. सब खामोश. वहाँ एक चुटियावाला आदमी  तिवारी का काम करा रहा था. मैंने उससे कहा तो उसने रूखा जवाब दिया, अभी सुबह नहीं हुई है, कर रहे हैं, कर देंगे. हटा देंगे, ज्यादा हाइपर न होईए. दोपहर गुजर गयी मगर उनकी सुबह नहीं आयी.  मैंने फिर पुलिस अधिकारी से सम्पर्क किया तो पता चला कि मिस्टर तिवारी को जे सी बी नहीं मिल पा रही है. मैंने कहा कि अगर मैं जे सी बी मँगवा दूँ तो..अधिकारी ने कहा, आप को मिल जाय तो मँगा लीजिए और जब जे सी बी आ जाए तो मुझे फोन कर दीजिएगा, मैं फोर्स भेज दूँगा, आप मोरंग हटवा दीजिएगा. मैंने जे सी बी मंगा  ली. उसके आते ही मिस्टर तिवारी आए, उन्होंने मुझे बताया कि  खाली प्लॉट में डलवा दीजिए. मैंने उनको बताया कि इसे तीन हजार रुपए भी देने हैं. मिस्टर तिवारी ने कहा, कोई बात नहीं, हो जाएगा. मुझे लगा, समस्या हल हो गयी लेकिन जे सी बी ने अभी एक तिहाई भी मोरंग नहीं उठायी होगी कि  तिवारी की पत्नी आकर मशीन के सामने खड़ी हो गयी और गाली देने लगी, चिल्लाने लगी. तिवारी के तेवर भी अचानक बदल गए, वह भी अनाप-शनाप बोलने लगा. जे सी बी वाला डर कर भाग गया.मैंने सुना, तिवारी की पत्नी ने किसी को फोन किया और कुछ ही पलों में एक गाड़ी से दनदनाते हुए एक दर्जन हथियारबंद लोग आ गए. आते ही उन्होंने  मेरे घर पर धावा बोल दिया, गरियाते हुए, औकात पूछते हुए और  धमकाते हुए. शोर सुनकर मेरे एक पत्रकर साथी भी आए, उन्होंने हस्तक्षेप करने की कोशिश की लेकिन हमलावर किसी की कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे. इस बीच मैंने पुलिस अधिकारी को कई बार फोन करने की कोशिश की मगर नाकाम रहा. उनका जब तक फोन आया, तब तक मिस्टर तिवारी के बुलावे पर आए लोगों ने मुझे, मेरी पत्नी को झुकाने, डराने, धमकाने और मैनहैंडलिंग के हर सम्भव जतन कर लिए. जब हम नहीं डरे तो वे सब बाहर निकलकर खड़े हो गए और तिवारी दम्पती  चीख-चीख कर चुनौती देने लगे, अब जिसे बुलाना हो बुला लो और एक इंच भी मोरंग हटवा कर दिखा दो.
मैं पसोपेश में था. समझ में नहीं आ रहा था क्या करूँ. इसी बीच पुलिस अधिकारी का फोन आया. मैंने उन्हें सारी बात बतायी, अपमानजनक घटना का पूरा ब्योरा दिया. तब तक मेरे मित्र अरुण सिंह और रामबाबू भी आ गए थे. आधे घंटे बाद पुलिस आयी. जे सी बी बुलाने की बहुत कोशिश हुई पर वह भाग चुका था, मिला नहीं. फिर पुलिस ने आस-पास काम कर रहे मजदूरों को लगाकर मोरंग हटवायी.
वैसे तो मैं कानून के अलावा किसी से डरता नहीं हूँ , और अन्यायी, अपराधी और गुंडे मवालियों से तो बिलकुल ही नहीं लेकिन सोचता हूँ कि जब पुलिस और एस टी एफ के लोग इस तरह कानून तोड़ने वाले, अराजक और अपराधी किस्म के मित्रों और रिश्तेदारों की मदद में आम जीवन जीने वालों का जीना हराम करने के लिए बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति लिए, बिना किसी असाइनमेंट के गुंडों की तरह कहीं भी हमला करने लगेंगे तो हम जैसे आम और साधारण लोगों का जीवन कभी भी संकट में पड़  सकता है. (बाद में मैंने जानना चाहा कि वह सचमुच एस टी एफ वाला था या नहीं. फेसबुक  पर ढूँढा तो उसका प्रोफाइल मिला, वह एस टी एफ से ही है, दो चित्र उस समय के हैं जब मेरे घर के सामने मोरंग पटा था और दो चित्र एस टी एफ वाले रणजीत राय के )
वरिष्ठ पत्रकार और जनसन्देश time के सम्पादक सुभाष राय ने इस पूरे मामले की घटना के तुरंत बाद एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश को एक पत्र  भेजकर कार्यवाही की माॅग की।
उपरोक्त मामले को लेकर राजधानी के पत्रकारो मे रोष व्याप्त है। पत्रकारो का कहना है कि रणजीत राय और उसके साथ गये सभी एसटीएफ के लोगो को सस्पेन्ड किया जाये।


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