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पद्मभूषण महाकवि गोपाल दास नीरज का दिल्ली मे निधन

पद्मभूषण महाकवि गोपाल दास नीरज का दिल्ली मे निधन

2018-07-19 16:16:29
पद्मभूषण महाकवि गोपाल दास नीरज का दिल्ली मे निधन

बुढापे मे गोपालदास नीरज की यशभारती पेन्शन योगी सरकार ने कर दी थी बन्द

योगी सरकार से यशभारती पेंशन की मांग की अधूरी हसरत लेकर चले गये नीरज जी- हर्षवर्धन अग्रवाल
lucknow-पद्मभूषण महाकवि गोपाल दास नीरज का गुरुवार शाम को दिल्ली एम्स में निधन हो गया। शाम करीब 7.32 मिनट पर गोपाल दास नीरज ने अंतिम सांस ली। तबीयत खराब होने के बाद उन्हें बुधवार को आगरा से दिल्ली के एम्स अस्पताल लाया गया। बुधवार शाम करीब 10 बजे वे आगरा से एम्स अस्पताल पहुंचे। जहां, उन्हें ट्रामा सेंटर के आईसीयू में भर्ती कराया गया था।
हेल्प यू एजुकेशनल एन्ड चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक हर्षवर्धन अग्रवाल ने बताया कि कवि गोपालदास नीरज के पौत्र पल्लव नीरज के न्यूयार्क से आने के बाद 21 जुलाई को अलीगढ मे गोपालदास नीरज का अन्तिम संस्कार किया जायेगा। उन्होने बताया कि गोपाल दास नीरज को यश भारती पुरस्कार मिला था जिसकी वजह से उन्हे हर महीने पेन्शन मिला करती थी जो योगी सरकार के आते ही बन्द कर दी गयी। हर्षवर्धन अग्रवाल ने बताया कि योगी सरकार से नीरज जी कई बार यश भारती पेंशन को देने की माॅग करते रहे मगर योगी जी हमेशा कहते रहे वह उनके मामले को दिखवा रहे है जो आज तक योगी सरकार द्वारा देखा ही जा रहा है। उन्होने बताया कि नीरज जी यश भारती पेन्शन की मांग की अधूरी हसरत लेकर चले गये। ज्ञात हो कि कवि गोपाल दास नीरज हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के संरक्षक थे।
महाकवि नीरज को मंगलवार सुबह सांस लेने में दिक्कत हुई। इसके बाद उन्हें आगरा के एक अस्पताल में वेंटीलेटर पर रखा गया था। जांच के बाद उनके पायोनिमोथैरस रोग से पीड़ित होने की पुष्टि हुई थी। इस बीमारी में सीने में पस भरने और फेफड़ों में हवा भरने से उसकी झिल्ली को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है। मंगलवार को उनकी हालत नाजुक होने पर चिकित्सकों ने उन्हें एम्स ले जाने की सलाह दी थी, लेकिन हालत गंभीर होने पर एम्स के ट्रामा सेंटर के चिकित्सकों के निर्देशन में उनका आगरा में ही इलाज शुरू कर दिया गया था। लेकिन बाद में उन्हें बुधवार रात 10 बजे दिल्ली एम्स लाया गया।
पुरस्कार एवं सम्मान-1991 में पद्मश्री सम्मान,1994 में यश भारती सम्मान,2007 में पद्म भूषण सम्मान,विश्व उर्दू परिषद् पुरस्कार,फिल्म फेयर पुरस्कार
नीरज जी को फिल्म जगत में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिए 70 के दशक में लगातार तीन बार यह पुरस्कार दिया गया। उनके द्वारा लिए गये पुररकृत गीत हैं- काल का पहिया घूमे रे भइया! (फिल्मरू चन्दा और बिजली), बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ (फिल्मरू पहचान), ए भाई! जरा देख के चलो (फिल्मरू मेरा नाम जोकर)
मन्त्रीपद का विशेष दर्जा भी मिला रू उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार ने नीरजजी को भाषा संस्थान का अध्यक्ष नामित कर कैबिनेट मन्त्री का दर्जा दिया था।
इटावा में बचपन-गोपालदास सक्सेना ‘नीरज’ का जन्म 4 जनवरी 1924 को इटावा जिले के पुरावली गांव में हुआ। मात्र छह साल की उम्र में पिता ब्रजकिशोर सक्सेना का साया उनके उपर से उठ गया। नीरज ने 1942 में एटा से हाई स्कूल परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। परिवार की माली हालत अच्छी नहीं थी इसलिए शुरुआत में इटावा की कचहरी में कुछ समय टाइपिस्ट का काम किया उसके बाद सिनेमाघर की एक दुकान पर भी नौकरी की। लंबी बेरोजगारी के बाद दिल्ली जाकर सफाई विभाग में टाइपिस्ट की नौकरी करने लगे।
कानपुर में संघर्ष के दिन -दिल्ली से नौकरी छूट जाने पर नीरज कानपुर पहुंचे और वहां डीएवी कॉलेज में क्लर्क की नौकरी की। फिर बाल्कट ब्रदर्स नाम की एक प्राइवेट कंपनी में पांच साल तक टाइपिस्ट का काम किया। कानपुर के कुरसंवा मुहल्ले में उनका लंबा वक्त गुजरा। नौकरी करने के साथ ही प्राइवेट परीक्षाएं देकर उन्होंने 1949 में इंटरमीडिएट, 1951 में बीए और 1953 में प्रथम श्रेणी में हिन्दी साहित्य से एमए किया।
कॉलेज शिक्षक की नौकरी -नीरज ने मेरठ कॉलेज मेरठ में हिन्दी प्रवक्ता के पद पर कुछ समय तक अध्यापन कार्य भी किया। बाद में वहां की नौकरी से त्यागपत्र देना पड़ा। उसके बाद वे अलीगढ़ के धर्म समाज कॉलेज में हिन्दी विभाग के प्राध्यापक नियुक्त हो गए। फिर अलीगढ़ उनका स्थायी ठिकाना बना और मैरिस रोड जनकपुरी अलीगढ़ में स्थायी आवास बनाकर रहने लगे।
कवि सम्मेलनों में लोकप्रिय-अपनी रुमानी कविताओं के कारण नीरज को देश भर के कवि सम्मेलनों से बुलावा आने लगा। वे हिंदी कविता में मंच के लोकप्रिय कवियों में शुमार हो गए। नीरज खुद को कवि बनने में सबसे बड़ी प्रेरणा हरिवंश राय बच्चन की निशा निमंत्रण को मानते थे।
फिल्मो में कदम-नीरज को मुंबई के फिल्म जगत से गीतकार के रूप में फिल्म नई उमर की नई फसल के गीत लिखने का निमन्त्रण मिला। पहली ही फिल्म में उनके लिखे कुछ गीत - कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे... और देखती ही रहो आज दर्पण न तुम, प्यार का यह मुहूरत निकल जाएगा...बेहद लोकप्रिय हुए। इसके बाद वे मुंबई में रहकर फिल्मों के लिए गीत लिखने लगे। उन्होंने मेरा नाम जोकर,  शर्मीली और प्रेम पुजारी जैसी कई चर्चित फिल्मों में कई लोकप्रिय गीत लिखे थे।

राज्यपाल ने विख्यात कवि गोपाल दास ‘नीरज’ के निधन पर दुःख व्यक्त किया

गोपाल दास ‘नीरज’ के निधन से हिन्दी साहित्य के एक युग का अवसान हो गया&राज्यपाल

गोपाल दास ‘नीरज’ जी की राजकीय सम्मान के साथ उनकी अन्तिम यात्रा निकाली जाएगी-CM

मुख्यमंत्री ने गोपाल दास ‘नीरज’ जी की स्मृति में प्रत्येक वर्ष प्रदेश के 5 नवोदित कवियों को एक-एक लाख रु0 का पुरस्कार, अंगवस्त्र व सम्मान-पत्र दिए जाने की घोषणा की

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल  राम नाईक ने पद्म भूषण से सम्मानित हिन्दी के अत्यन्त विख्यात कवि एवं गीतकार गोपाल दास ‘नीरज’ के निधन पर दुःख व्यक्त किया है।
राज्यपाल ने अपने शोक संदेश में कहा है कि उत्तर प्रदेश में जन्में गोपाल दास नीरज अत्यन्त लोकप्रिय कवि एवं गीतकार थे जिन्होंने पाँच दशक से अधिक वर्षों तक मंच पर काव्य पाठ किया। गोपाल दास ‘नीरज’ जी से वे व्यक्तिगत रूप से परिचित थे तथा अनेक अवसरों पर उनको सुनने का अवसर प्राप्त हुआ था। वे अत्यंत व्यवहार कुशल एवं अपने क्षेत्र में अद्वितीय थे। उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ से 1991 में तथा ‘पद्म भूषण’ से 2007 में सम्मानित किया गया था। गोपाल दास ‘नीरज’ का निधन हिन्दी साहित्य की अपूरणीय क्षति है। स्व0 गोपाल दास ‘नीरज’ अपनी कालजयी रचनाओं से सदैव स्मृतियों में जीवंत रहेंगे। राज्यपाल ने कहा कि गोपाल दास ‘नीरज’ के निधन से हिन्दी साहित्य के एक युग का अवसान हो गया है।
राज्यपाल ने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए दुःखी परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि पद्म भूषण एवं यश भारती से सम्मनित गोपाल दास नीरज का निधन हिंदी जगत पर वज्रपात है। वे हिंदी साहित्य के श्रृंगार थे, उनके रहते बहार थी, अब तो बस गुबार ही रह गया है। 


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