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कालाहांडी होने से बचा लखनऊ,बेसहारा महिला को समय पर मदद कर उसके पति के शव को भेजा गया सीतापुर

कालाहांडी होने से बचा लखनऊ,बेसहारा महिला को समय पर मदद कर उसके पति के शव को भेजा गया सीतापुर

2018-08-06 19:13:29
कालाहांडी होने से बचा लखनऊ,बेसहारा महिला को समय पर मदद कर उसके पति के शव को भेजा गया सीतापुर

लोहिया के सीएमएस डाक्टर नेगी ने शव भिजवाने मे जताई असमर्थता
बेसहारा महिला के मदद के लिये संवाददाता के फोन को नही उठाया जिलाधिकारी लखनऊ ने  
मुख्यमन्त्री आवास के अधिकारियो के हस्तक्षेप के बाद पीडित महिला की हुई मदद,एक धन्टे के अन्दर पहुॅचा सरकारी शववाहन
कुल दो धन्टे के अन्दर पूरी कहानी का हुआ पटाक्षेप
लखनऊ-कहते है जब किसी अंसम्भव काम को कई लोग मिलकर करते है तो वह काम सम्भव हो जाता है। जी हाॅ हम बात कर रहे है आज उस धटना की जो उडीसा के कालाहांडी और बौद्ध जिले मे पहले हो चुकी है और योगी सरकार के अधिकारियो के चलते अपने उत्तर प्रदेश मे दोहराई नही गयी।  


अगस्त 2016 मे कालाहांडी के दानामांझी को उडीसा की सरकार ने मदद नही की जिसका नतीजा यह रहा कि दानामांझी को को अपनी मृत पत्नी को कई किलोमीटर कन्धे पर ढोना पडा था। इस दंश को दानामांझी के साथ उसकी लडकी ने भी झेला था। दूसरी धटना भी उडीसा की ही है जब मृत शरीर को साइकिल पर ले जाने के लिये एक आदमी विवश हुआ। 
लेकिन अपने उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियो के त्वरित कार्यवाही के चलते लखनऊ मे कालाहांडी और बौद्ध जिले सरीखे धटना नही हुई।  

 

धटना आज शाम की है जब इस संवाददाता के मोबाइल पर शाम साढे सात बजे के आस-पास रजत नामक युवक का फोन आता है। रजत ने बताया कि वह इस समय लोहिया अस्पताल अपने एक रिश्तेदार को देखने आया है और यहाॅ पर एक महिला जिसके साथ उसकी चार छोटी छोटी बच्चिया है। जो सीतापुर से अपने पति बालक राम यादव जो एक दिहाडी मजदूर था के इलाज के लिये आयी थी जहाॅ उसके पति की मौत हो गयी। 
रजत ने बताया कि उस महिला के पास इतने पैसे भी नही है कि वह अपने पति के मृत शरीर को लेकर सीतापुर जा सके। इस संवाददाता ने इस धटना पर खबर लिखे जाने से पहले उस महिला की कैसे मदद हो इस पर ध्यान केन्द्रित किया। कई बडे अधिकारियो को इस संवाददाता द्वारा फोन कर हकीकत से रूबरू करवाने चाहा तो जिलाधिकारी को छोड सभी समबन्धित लोगो ने इस संवाददाता का फोन उठाया। 

पहले लोहिया अस्पताल के सीएमएस डाक्टर नेगी से उस महिला की मदद करने की बात संवाददाता ने कही तो उन्होने लखनऊ शहर क्षेत्र से बाहर मदद करने मे अपनी असमर्थता जतायी। मगर उन्होने इस समबन्ध मे जिलाधिकारी से बात करने की सलाह दी। संवाददाता ने जिलाधिकारी को कई बार फोन किया मगर जिलाधिकारी महोदय ने फोन नही उठाया। 
फिर क्या था सारी जानकारी संवाददाता ने मुख्यमन्त्री आवास पर बैठे अधिकारियो को दी। संवेदनशील मुख्यमन्त्री कार्यालय ने मानवीय पहलू को ध्यान मे रखकर तत्काल उस महिला के मदद के लिये आगे आया और कुछ देर बाद एक सरकारी शव वाहन लोहिया अस्पताल पहुॅच गया जहाॅ से वह महिला अपने पति के मृत शरीर और अपने चार छोटी छोटी बच्चियो को लेकर रमेश खंेडा तहसील पिसीन्डी सीतापुर रवाना हो गयी।  
देखा जाये तो इस मसले मे सबसे अच्छा काम प्रदेश सरकार के मुख्यमन्त्री आवास के अधिकारियो ने किया। इन अधिकारियो के त्वरित मदद से उत्तर प्रदेश उडीसा होने से बचा। 
इस धटना की जानकारी मुख्यमन्त्री आवास को होने से पहले कही से एनजीओ एक कोशिश एैसी भी की वर्षा वर्मा और दिव्य सेवा फाॅउन्डेशन के दीपक महाजन को हुई तो इन लोगो ने इस संवाददाता से कहा कि अगर सरकार कोई मदद नही करती तो वह लोग अपने खर्चे पर मृत बालक राम यादव के शरीर को सीतापुर ले जाकर उसका अन्तिम संस्कार करेगें। 
रजत वर्मा की जुबानी- गोमती नगर निवासी रजत ने बताया कि वह अस्पताल मे अपने एक रिश्तेदार को देखने गये थे तभी उनको यह जानकारी हुई। रजत ने बताया कि सीतापुर के रमेश खेडा का निवासी बालक राम यादव जो कि पहले प्लाईबुड फैक्ट्री मे काम करता था मगर कुछ दिन पूर्व उसका काम छुट गया था।

उन्होने बताया कि वर्तमान समय मे बालक राम यादव दिहाडी मजदूरी का काम करता था। रजत के मुताबिक बालक राम यादव के धर मे उसके अलावा कोई कमाने वाला नही था। उन्होने बताया कि बालक राम के पत्नी के पास इलाज के लिये इतने पैसे नही थे कि वह अपने पति का इलाज कायदे से करवा सके। इसके लिये महिला ने अपना मोबाइल लोहिया अस्पताल के पास किसी को बेच दिया। रजत वर्मा ने बताया कि महिला के पास पैसे न होने की दशा मे उन्होने और कुछ अन्य लोगो ने कुछ पैसो की मदद उस महिला को सीतापुर जाते समय किया।  

रजत ने बताया कि बालक राम के चार छोटी छोटी लडकिया है सबसे बडी की उम्र लगभग 8 साल और सबसे छोटी की लगभग 2 साल है। रजत के मुताबिक लोहिया अस्पताल के डाक्टरो खासकर डाक्टर राहुल कश्यप ने उस महिला की काफी मदद की। 
देखा जाये तो एैसे समय मे जब कोई किसी के मदद को आगे नही आता एैसे मे रजत वर्मा,वर्षा वर्मा और दीपक महाजन जैसे लोग आगे आते है तो यह कहा जा सकता है कि इन्सानियत आज भी जिन्दा है और मुख्यमन्त्री आवास के अधिकारियो के क्या कहने उनको तो सैल्यूट करने का मन करता है।


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