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CM ने बी0आर0डी0 मेडिकल काॅलेज परिसर में 104 करोड़ रु0 लागत की दो परियोजनाओं का किया शिलान्यास

CM ने बी0आर0डी0 मेडिकल काॅलेज परिसर में 104 करोड़ रु0 लागत की दो परियोजनाओं का किया शिलान्यास

2018-09-02 17:52:49
CM ने बी0आर0डी0 मेडिकल काॅलेज परिसर में 104 करोड़ रु0 लागत की दो परियोजनाओं का किया शिलान्यास

लखनऊ--उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज जनपद गोरखपुर के बी0आर0डी0 मेडिकल काॅलेज परिसर में कुल 104 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली दो परियोजनाओं का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया। इनमें 84 करोड़ रुपये की लागत के आर0एम0आर0सी0 भवन तथा 20 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाला सी0आर0सी0 भवन एवं दिव्यांगजन के लिए हाॅस्टल का निर्माण शामिल है। इसके साथ ही, उन्होंने आई बैंक का लोकार्पण तथा स्व0 कुंवर बहादुर कौशिक द्वारा लिखित पुस्तक ’हेमू विक्रमादित्य’ का विमोचन भी किया।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्माण एजेंसी को निर्देश दिये कि जिन दो परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया है, उनको निर्धारित समय सीमा वर्ष 2020 के अन्तर्गत गुणवत्तायुक्त ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में कोई ‘आई बैंक’ नहीं था। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला ‘आई बैंक’ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वांचल पिछले 40 वर्षों से इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी से प्रभावित रहा है। इस बीमारी पर नियंत्रण पाने के उद्देश्य से आर0एम0आर0सी0 भवन का शिलान्यास किया गया है। यह संस्थान स्वास्थ्य शोध की समग्र स्थिति में सुधार एवं विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के लिए अनुसंधान के क्षेत्र में क्षमता निर्माण करेगा। यह शोध केन्द्र पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए काफी लाभकारी सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि वेक्टरजनित बीमारियों का पता कर यदि उसका समय से उपचार किया जाता है, तो निश्चित रूप से अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंसेफेलाइटिस बीमारी से पीड़ित बच्चों की मृत्यु दर 20 से 25 प्रतिशत है। जो बच्चे बचते हैं, उनमें अधिकंाश बच्चे शारीरिक रूप से दिव्यांगता के शिकार होते हैं। इस स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए समेकित क्षेत्रीय केन्द्र ‘दिव्यांगजन’ (सी0आर0सी0) की स्थापना की जा रही है। यह मासूमों के सुनहरे भविष्य के लिए बेहतर सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 250 करोड़ रुपये की लागत से 8 सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनकर तैयार हो गये हैं, जिन्हें अगले माह लोकार्पित किया जायेगा। इसके अलावा, जनपद में एम्स स्थापना की प्रगति काफी तेज है और वर्ष 2020 तक एम्स पूर्ण रूप से संचालित हो जायेगा। शीघ्र ही, 500 बेड के बाल रोग संस्थान का भी संचालन आरम्भ हो जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने उत्तर प्रदेश के लिए 13 नये मेडिकल काॅलेज दिये हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बी0एच0यू0 को एम्स के स्तर का बनाने के लिए भी कार्य किया जा रहा है। इंसेफेलाइटिस पर काफी नियंत्रण पाया गया है। इसके उन्मूलन के लिए आवश्यक है कि सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाये। स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति लोगों में जागरूकता का होना आवश्यक है, तभी इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि टीमवर्क होगा, तो निश्चित रूप से उसके बेहतर परिणाम होंगे।
इसके पूर्व, मुख्यमंत्री ने सीतापुर नेत्र चिकित्सालय में अस्थायी रूप से निर्मित समेकित क्षेत्रीय केन्द्र ‘दिव्यांगजन’ का लोकार्पण किया तथा वहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। यह केन्द्र अभी अस्थायी रूप से सीतापुर नेत्र चिकित्सालय में संचालित होगा और मेडिकल काॅलेज में भवन तैयार होने के उपरान्त वहां पर शिफ्ट होगा। सी0आर0सी0 के संचालन से अब दिव्यांगजनों को बेहतर सुविधाएं मिलने में सुविधा होगी।
इस अवसर पर केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि एक राज्य में एक सी0आर0सी0 होता है, लेकिन उत्तर प्रदेश में दो सी0आर0सी0 की स्थापना की गयी है। एक लखनऊ में तथा दूसरा गोरखपुर में। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए एक्ट बनाया गया है, जिसकी अन्य देशों में भी सराहना की जा रही है। प्रदेश में लगभग 3,000 कैम्प आयोजित कर लाखों की संख्या में दिव्यांगजनों को लाभान्वित किया गया है। दिव्यांगजनों के हितार्थ अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि 3 लाख दिव्यांगजनों को कौशल प्रशिक्षण तथा 7 लाख दिव्यांगजनों को 3 से 4 प्रतिशत की दर पर ऋण उपलब्ध कराया गया है। कौशल प्रशिक्षण के तहत 2,000 का मानदेय भी दिया जाता है।
केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे0पी0 नड्डा ने कहा कि अच्छी नीयत से कार्य करने से विकास होता है। 84 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस रिसर्च सेण्टर में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जो बीमारियों की जानकारी उपलब्ध कराने में सहायक होंगी। उन्होंने निपाह वायरस के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि समय से निपाह वायरस के बारे में जानकारी मिल जाने से सही इलाज में सहायता मिलती है। यह वायरोजी सेण्टर की देन है। गोरखपुर में जे0ई0/ए0ई0एस0 से बचाव एवं नियंत्रण के लिए मुख्यमंत्री जी ने लगातार कार्य किया है।
इस अवसर पर चिकित्सा एवं प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन, जनप्रतिनिधिगण, अपर मुख्य सचिव सूचना  अवनीश कुमार अवस्थी, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दुबे, हेल्थ रिसर्च के सचिव डाॅ0 बलराम भार्गव तथा शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


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