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मिस्टर मिस एन्ड मिसेज एविक इन्डिया-2018 मे नेपाल की सुमित्रा भटटाराई थापा के सिर पर सजा खुबसूरती का ताज

मिस्टर मिस एन्ड मिसेज एविक इन्डिया-2018 मे नेपाल की सुमित्रा भटटाराई थापा के सिर पर सजा खुबसूरती का ताज

2018-09-26 07:20:04
मिस्टर मिस एन्ड मिसेज एविक इन्डिया-2018 मे नेपाल की सुमित्रा भटटाराई थापा के सिर पर सजा खुबसूरती का ताज

दिल्ली- मिस्टर मिस एन्ड मिसेज एविक इन्डिया-2018 मे नेपाल की सुमित्रा भटटाराई थापा ने सौन्दर्य का ताज अपने नाम किया। नेपाल के एक छोटे टाऊन से ताल्लुक रखने वाली सुमित्रा एक होनहार छात्रा के साथ कब्बडी की नेशनल खिलाडी भी रही है। बचपन से सामाजिक तानेबाने को देखा और इसी का असर रहा कि उन्हे गरीब बच्चो के लिये हमेशा कुछ करने की ललक रही। अपनी पढाई के साथ सुमित्रा ने अपने गाॅव के बच्चो को निशुल्क पढाने का बीडा उठाया और एक समय एैसा भी आया कि जब उनके गाॅव का हर आमो- खास साक्षर हो गया। सुमित्रा ने गाॅव के बडे बुजुर्गो को भी ज्ञान की पाठशाला से रूबरू करवाया।
अपने मन मे डाक्टर बनने की चाहत रखने वाली सुमित्रा भटटाराई थापा ने गाॅव मे सस्कृत कार्यक्रमो की रूपरेखा बनायी और लोगो को उससे परिचित कराया। सुमित्रा ने बच्चो के साथ स्ट्रीट प्ले करके उन्हे रंगमच की बारिकियो को समझाया। 14 साल की आयु मे माता पिता के अलगाव होने के बाद उनके डाक्टर बनने की तम्मना अधूरी रह गयी। 15 साल की अल्प आयु मे सुमित्रा की शादी हो गयी। सुमित्रा के पति दिल्ली मे रहते थे लिहाजा उन्हे भी दिल्ली आना पडा। नयी जगह आकर उन्हे थोडी परेशानी भाषा और रहन सहन की उठानी पडी पर धीरे धीरे उन्होने सब एडजस्ट कर लिया। मन मे बडे सपने सजाये सुमित्रा के जल्दी जल्दी एक बेटी और एक बेटा हो गये फिर उन्होने बच्चो की खातिर अपने सपनो को दबा दिया। लेकिन कहावत है कि कुछ करने की ललक रखने वाले लोग ज्यादा दिन तक अपनी ललक दबा नही पाते वही सुमित्रा के साथ हुआ। बच्चे बडे हुये तो उन्होने अपनी कला और सौन्दर्य को एक बार फिर से प्लेटफार्म पर लाने की सोची और यह सपने पूरे हुये मिस्टर मिस एन्ड मिसेज एविक इन्डिया-2018 के मंच पर जहाॅ उन्हे जीत का क्राऊन पहनाया गया।


इंडो-इंडियन एजुकेशनल इंडिया 2018 ताज अपने नाम करने के बाद सुमित्रा ने एक उदाहरण पेश किया कि अगर मन मे कुछ करने की इच्छा है तो उसमे उम्र बाधा नही बन सकती। वाइल्ड कार्ड से प्रतिस्पर्धा में शामिल होकर जीत दर्ज करने वाली सुमित्रा ने नेपाल का प्रतिनिधीत्व कर एक तरफ अपने देश का मान बढाया वही दुसरी तरफ भारत मे रह रहे नेपाली लोगो के लिये एक मिशाल बनी।
वर्तमान समय मे सुमित्रा भटटाराई थापा समाज कार्यो मे अपना समय व्यतीत करती है। इस वक्त सुमित्रा कई गरीब बच्चो को पढाने का खर्चा उठाती है साथ ही साथ सुमित्रा की पढाई जो 25 साल पहले छुट गयी थी उसे भी उन्होने एक बार फिर से शुरू किया है। सुमित्रा का सपना है कि वह एक एैसा स्कुल खोले जिसमे हजारो गरीब बच्चे निशुल्क पढ सकें। सुमित्रा को बुजुर्गो से काफी लगाव है तभी तो वह समय समय पर बृद्धाश्रम जाकर इन बुजुर्गो की सेवा करती रहती है।


सुमित्रा की इस जीत मे उनके परिवार तथा भारत मे रह रहे नेपाली परिवार के लोगो का काफी अहम योगदान रहा।


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