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भगत सिंह के जयंती पर पढ़ें उनके क्रांतिकारी विचार

भगत सिंह के जयंती पर पढ़ें उनके क्रांतिकारी विचार

2018-09-28 08:07:36
भगत सिंह के जयंती पर पढ़ें उनके क्रांतिकारी विचार

शहीद भगत सिंह का देश के महान शहीदों में सबसे प्रमुख हैं। भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर, 1907 लायलपुर के बंगा में हुआ था। शहीद-ए-आजम के पूरे परिवार के खून में देशभक्ति दौड़ती थी और इसी वजह से भगत सिंह के अंदर भी देशभक्ति का जुनून सवार था।
जब 23 मार्च 1931 को उन्हें लाहौर की जेल में उन्हें फांसी दी जा रही थी तो उस दौरान भगत सिंह ने नारा दिया 'इंकलाब जिंदाबाद' और इसके बाद वो मुस्कुराते रहे और देश के शहीद हो गए। आज हम आपको भगत सिंह के कुछ ऐसे ही नारे के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें पढ़कर आज भी आप में देशभक्ति का जज्बा जाग जाएगा।
महात्मा गांधी ने जब 1922 में चौरीचौरा कांड के बाद असहयोग आंदोलन को खत्म करने की घोषणा की तो भगत सिंह का अहिंसावादी विचारधारा से मोहभंग हो गया। उन्होंने 1926 में देश की आजादी के लिए नौजवान भारत सभा की स्थापना की।  23 मार्च 1931 की रात भगत सिंह को सुखदेव और राजगुरु के साथ लाहौर षडयंत्र के आरोप में अंग्रेजी सरकार ने फांसी पर लटका दिया। यह माना जाता है कि मृत्युदंड के लिए 24 मार्च की सुबह ही तय थी, मगर जनाक्रोश से डरी सरकार ने 23-24 मार्च की मध्यरात्रि ही फांसी पर लटका दिया था।
भगत सिंह के नारे...
•    इंकलाब जिंदाबाद
•    साम्राज्यवाद का नाश हो।
•    राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में भी आज़ाद है।
•    ज़रूरी नहीं था की क्रांति में अभिशप्त संघर्ष शामिल हो, यह बम और पिस्तौल का पंथ नहीं था।
•    बम और पिस्तौल क्रांति नहीं लाते, क्रान्ति की तलवार विचारों के धार बढ़ाने वाले पत्थर पर रगड़ी जाती है।
•    क्रांति मानव जाति का एक अपरिहार्य अधिकार है। स्वतंत्रता सभी का एक कभी न ख़त्म होने वाला जन्म-सिद्ध अधिकार है। श्रम समाज का वास्तविक निर्वाहक है।
•    व्यक्तियो को कुचल कर, वे विचारों को नहीं मार सकते।
•    निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र विचार ये क्रांतिकारी सोच के दो अहम लक्षण हैं।
•    मैं एक मानव हूं और जो कुछ भी मानवता को प्रभावित करता है उससे मुझे मतलब है।
•    प्रेमी, पागल, और कवी एक ही चीज से बने होते हैं।
•    आज उनकी जयंती पर पढ़ें 5 विचार:
•    बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं आती, क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है।
•    निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र विचार, ये दोनों क्रांतिकारी सोच के दो अहम लक्षण हैं।
•    राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है. मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में आजाद है।
•    प्रेमी पागल और कवि एक ही चीज से बने होते हैं और देशभक्तों को अक्सर लोग पागल कहते हैं।
•    जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधों पर जी जाती है, दूसरों के कंधे पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं।
•    व्यक्तियों को कुचलकर भी आप उनके विचार नहीं मार सकते हैं।
•    निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र विचार ये क्रांतिकारी सोच के दो अहम लक्षण हैं।


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