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सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर एस के जैन दावा उनकी डिग्रियां और दवाईयां दोनों सही

सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर एस के जैन दावा उनकी डिग्रियां और दवाईयां दोनों सही

2018-10-09 19:28:24
सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर एस के जैन दावा उनकी डिग्रियां और दवाईयां दोनों सही

लखनऊ- डॉक्टर एस के जैन ने दावा किया कि उनकी डिग्रियां और दवाईयां दोनों सही है। जैन ने एक बयान में कहा, औषधि विभाग (एफएसडीए) की टीम के द्वारा 25 जनवरी 2018 को हमारी डिग्रियों और दवाईयों का निरीक्षण किया गया जिसमें मेरी सभी डिग्रियां सही साबित हुई और मरीजों को दी जाने वाली दवाईयों के सैम्पल को राजकीय विश्लेषक उत्तर प्रदेश लखनू की प्रयोगशाला में प्रस्तुत किया गया है। वहां पर उनकी दवाईयों में किसी प्रकार का ई उत्तेजक व हानिकारक पदार्थ प्राप्त नहीं हुआ।
डॉ. जैन की दवाओं में स्टराइड मिलने की पुष्टि हुई थी। इस पर जैन का दावा है कि उनकी दवाओं में सफेल मूसली का प्रयोग होता है। सफेद मूसली में एक केमिकल आयुर्वेदिक पदार्थ सैपोनिन होता है जो आयुर्वेदिक स्टराइड की श्रृंखला में पाया जाता है जो हानिकारक नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी दवाईयों का आयुर्वेदिक औषधि विभाग द्वारा परीक्षण कराया गया होतो वो स्टराइड विहीन पायी जाती।
राजाजीपुरम निवासी संजय शर्मा ने 13 जनवरी को मुख्यमंत्री के पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। संजय शर्मा ने डॉ. एसके जैन की डिग्री और दवाओं पर सवाल खड़े किए हैं? क्लीनिक की वेबसाइट में भी दवाओं के दावों की हकीकत परखने की गुहार मुख्यमंत्री से लगाई है। शिकायती पत्र में डॉ. जैन द्वारा इलाज के नाम पर मरीजों से धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है।
25 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत के बाद एफएसडीए की टीम ने बर्लिग्टन स्थित डॉ. एसके जैन कलीनिक में छापेमारी की थी। यहां बड़े पैमाने पर दवाओं के नमूने एकत्र किए थे। हरी, लाल, पीली दवाओं पर न तो किसी प्रकार का लेबल लगा था न ही दवाओं के निर्माण व एक्सपायर की तारीख दर्ज थी। दवाओं के नाम पर मरीजों को क्या खिलाया जा रहा था यह तक दवाओं पर दर्ज नहीं था। अधिकारियों ने आयुर्वेद के नाम पर एलोपैथिक दवाएं मरीजों को देने के शक में नमूने एकत्र किए थे। दवाओं की गुणवत्ता? क्या मिलाकर दवाएं तैयार की गई? उसकी पहचान के लिए नमूने राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला में भेजे गए थे।
डॉ. जैन की दवाओं की रिपोर्ट करीब दो महीने बाद मार्च में आई। आयुर्वेद औषधि में एलोपैथिक दवाओं की मिलावट की पुष्टि हुई है। ड्रग इंस्पेक्टर रमाशंकर ने बताया कि रिपोर्ट में स्टराइड की पुष्टि हुई है। आयुर्वेद की औषधि में एलोपैथिक स्टराइड का पता चला है। जो कि नियमों के खिलाफ है। बिना जरूरत स्टराइड देने घातक है। स्टराइड कुछ खास बीमारियों में ही दिया जाता है। मरीज व उनके परिवारीजनों की सहमति के बाद यह दवा शुरू की जा सकती है। उन्होंने बताया कि नमूने अद्योमानक मिले हैं। मसलन दवाओं का निर्माण कब हुआ? उसमें क्या मिलाया गया? दवाओं की मियाद क्या है? हालात यह है कि औषधि बनाने वाली फर्म तक का नाम दर्ज नहीं था।


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