गीता से मन शुद्ध होता है- न्यायमूर्ति शबीहुल हसनैन
लखनऊ-नवयुग डिग्री कॉलेज में ‘श्रीमद्भगवद् गीता की वैश्विक उपादेयता विषयक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति शबीहुल हसनैन ने कहा कि गीता में मानवीय संवेदना और मन के विचारों के बारे में कई स्थानों पर व्यापक वर्णन मिलता है। उन्होने कहा कि मानव सोच हर इंसान में एक जैसी होती है इसको पढ़कर मन को शुद्ध बनाया जा सकता है।
गीता पर काम कर रही हेनरीटा लूसी ने कहा कि गीता काम, क्रोध, लोभ, मोह, शुभ, अशुभ से मुक्त करती है। यह अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखकर कार्य करना भी सिखाती है। मन की मलिनता भी दूर होती है।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति शबीहुल हसनैन ने कहा कि महाभारत के बहुत से प्रंशगो को पढकर जीवन को नये और अच्छे रास्ते पर ढाला जा सकता है। उन्होने कहा कि श्रीमद्भगवद् गीता नकारात्मक उर्जा को खत्म कर मनुष्य को सकारात्मकता दिशा की तरफ बढने का मार्ग प्रशस्त करता है।
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